Skip to main content

सफल जीवन के लिए रोज करें इन 11 मन्त्रों का जाप | Daily Mantras for Happy life

Daily Morning Hindu Prayer Sanskrit slokas mantras with meaning Hindi | सफल जीवन के लिए प्रतिदिन बोले जाने वाले संस्कृत मन्त्र

दोस्तो हिन्दू धर्म हमेशा ही विज्ञान पर आधारित धर्म रहा है, यहाँ अपनाई गई प्रत्येक परम्परा और सिद्धांत का अपना एक महत्त्व रहा है|

आज प्रत्यक्ष रूप से जो भी विज्ञान हम चारों तरफ देख रहे हैं| वह हमारे वेदों में पहले से वर्णित है|

वेदों में दिन की पूरी दिनचर्या के लिए अलग अलग मन्त्र बताये गए हैं, जैसे सुबह उठने का मन्त्र, बिस्तर से प्रथम बार जमीन (धरती) पर पैर रखने का मन्त्र, भगवान् की पूजा करते समय, दीप (दिया) जलाने का मन्त्र, भगवान् की परिक्रमा करने का मन्त्र, किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले बोला जाने वाला मन्त्र और सोने से पहले बोला जाने वाला मन्त्र (Mantras)

इसके अलावा पुरे सप्ताह के भी देवताओं के अनुसार मन्त्रों का भी वर्णन किया गया है

Hindu Daily Prayers Mantras with Meaning in Hindi

वेदों में लिखा है, सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना सेहत के लिए लाभ दायक है| शास्त्रों में पूरे दिन की दिनचर्या के लिए संस्कृत श्लोकास बताये गए हैं|

इन श्लोक (Mantras) को प्रतिदिन नियमित रूप से बोलने पर निश्चित ही आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा|

शास्त्रों में कहा गया है, बिस्तर से उठते ही अपनी हथेली के दर्शन करने चाहिए, और नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करना चाहिए|

सुबह उठने के बाद बोला जाने वाला मन्त्र (कर दर्शन)

कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती।

कर मूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते कर दर्शनम्॥

अर्थ:- प्रभु मेरे हाथ के अग्र भाग (उँगलियों) में लक्ष्मी जी वास करें, मध्य भाग में (हथेली) सरस्वती का और हाथ के मूल भाग में स्वयं ब्रह्मा निवास करें

ऊपर वाले श्लोक के अलावा इस निम्नलिखित श्लोक को भी आप बोल सकते हैं

कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती।

करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम ॥

अर्थ;- प्रभु मेरे हाथ के अग्र भाग (उँगलियों) में लक्ष्मी जी वास करें, मध्य भाग में (हथेली) सरस्वती का और हाथ के मूल भाग में स्वयं गोविंद निवास करें

हथेलियों का दर्शन कर मन्त्र बोलने का सीधा सा अभिप्राय भगवान से प्रार्थना करना है, की में अपने कर्म और मेहनत के दम पर धन अर्जित कर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर सकूं और शिक्षा के माध्यम से अपनी और समाज की मदद कर सकूं| गोविन्द बस आप अपनी कृपा बनाये रखना

सुबह बिस्तर से प्रथम बार जमीन पर पैर रखते समय बोला जाने वाला मन्त्र

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले ।

विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे ।।

अर्थ:- हे समुद्ररूपी वस्त्र धारण करने वाली धरती माता, पर्वतों की श्रंखलाओं को आँचल की तरह ओड़ने वाली भूमिमाता, में आपको नमस्कार करता हूँ| मेरे पेरों का आपको स्पर्श होगा, इसके लिए में क्षमा प्रार्थी हूँ|

नहाते समय बोला जाने वाला मन्त्र

गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति ।

नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् संनिधिं कुरु ॥

अर्थ:- हे पवित्र नदियो गंगा यमुना गोदावरी सरस्वती नर्मदा सिन्धु कावेरी में आपका आह्वान करता हूँ, आप आयें और इस जल को पवित्र करें|

भगवान् की पूजा करते समय दीप प्रज्वलित करने का मन्त्र

शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा ।

शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते ॥

अर्थ:- दीप ज्योति को मेरा सादर प्रणाम, मेरे जीवन में सोभाग्य, आरोग्य, और सफलता आये और नकारात्मकता मेरे जीवन से चली जाए ऐसा आशीर्वाद दो, हे शुभ दीप ज्योति मेरे प्रणाम स्वीकार करो|

भगवान् की परिक्रमा करते हुए यह मन्त्र बोलें

यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च ।

तानि सर्वाणि नश्यन्ति प्रदक्षिणपदे पदे ॥

पदे पदे या परिपूजकेभ्यः सद्योऽश्वमेधादिफल ददाति ।

तां सर्वपापक्षयहेतुभूतां प्रदक्षिणां ते परितः करोमि ॥

हे प्रभु मेरी परिक्रमा स्वीकार करें, मेने पूर्व जन्म में जो भी पाप किये हैं, आपकी परिक्रमा के प्रत्येक पद आप उन्हें नष्ट कर दें, ऐसी आप कृपा करें|

अन्न ग्रहण (खाना खाते ) करते समय बोले यह मन्त्र

ब्रहमार्पणं ब्रहमहविर्‌ब्रहमाग्नौ ब्रहमणा हुतम्।

ब्रहमैव तेन गन्तव्यं ब्रहमकर्मसमाधिना ॥

ॐ सह नाववतु।

सह नौ भुनक्तु।

सह वीर्यं करवावहै।

तेजस्विनावधीतमस्तु।

मा विद्‌विषावहै ॥

ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:: ॥

अन्न ग्रहण करने से पहले विचार मन मे करना है किस हेतु से इस शरीर का रक्षण पोषण करना है| हे परमेश्वर एक प्रार्थना नित्य तुम्हारे चरणो में लग जाये तन मन धन मेरा विश्व धर्म की सेवा में ॥

अन्न ग्रहण (खाना खाने के बाद) करने के बाद बोलें यह मन्त्र

अगस्त्यम कुम्भकर्णम च शनिं च बडवानलनम।

भोजनं परिपाकारथ स्मरेत भीमं च पंचमं ।।

अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः।

यज्ञाद भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्म समुद् भवः।।

किसी काम को करने से पहले यह मन्त्र बोलें

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।

प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥

हे स्वेत वस्त्रधारी सर्वव्यापी, हमेशा सर्वत्र निवास करने वाले प्रभु मुझे आशीवाद दो और सारी मुश्किलों को दूर कर मेरा कार्य पूर्ण हो ऐसा आशीर्वाद दें|

शिक्षा (पढाई करते समय) ग्रहण करते समय बोला जाने वाला मन्त्र

सरस्वती नमस्तुभ्यं, वरदे कामरूपिणी ।

विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥

ज्ञान की देवी माँ सरस्वती को मेरा नमस्कार, वर दायिनी माँ भगवती को मेरा प्रणाम। अपनी विद्या आरम्भ करने से पूर्व आपका नमन करती हूँ , मुझ पर अपनी सिद्धि की कृपा बनाये रखें ।

सोने से पहले बोला जाने वाला मन्त्र

जले रक्षतु वाराहः स्थले रक्षतु वामनः ।

अटव्यां नारसिंहश्च सर्वतः पातु केशवः ।।

इस मंत्र का अर्थ है की हे भगवान विष्णु जल में वाराह देवता पृथ्वी पर वामन रूप में मेरी रक्षा करें| आकाश में नरसिंह भगवान रक्षा करें तो केशव सभी दिशाओं से मेरी रक्षा करें।

Practice Above mentioned Hindu Mantras Daily, and Experience a subtle change in your attitude that will dramatically change your whole life.

यह भी पढ़ें:-

चाणक्य निति [ प्रथम अध्याय ] हिंदी अर्थ सहित

Comments

Popular posts from this blog

Chanakya Niti Chapter 8 Hindi English | चाणक्य नीति आठवां अध्याय अर्थ सहित

Chanakya Niti eighth chapter 8 shlokas meaning in Hindi English | चाणक्य नीति आठवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित Chanakya Niti Chapter 8 in Hindi English | चाणक्य निति आठवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित संस्कृत श्लोक - 1 अधमा धनमिच्छन्ति धनं मानं च मध्यमाः। उत्तमा मानमिच्छन्ति मानो हि महतां धनम्।।1।। दोहा - 1 अधम धनहिं को चाहते, मध्यम धन अरु मान । मानहि धन है बडन को, उत्तम चहै मान ।।1।। हिंदी अर्थ:- चाणक्य यहाँ मनुष्य के तीन प्रकार के बारे में बताते हुए कहते हैं, अधम प्रकार के मनुष्य सिर्फ धन की इच्छा रखते हैं, वे धन अर्जन के लिए किसी भी युक्ति का प्रयोग कर सकते हैं| माध्यम प्रकार के लोग धन और मान दोनों की इच्छा रखते हैं, ऐसे लोग धन तो चाहते हैं लेकिन समान के साथ| लेकिन उत्तम प्रकार के लोग सिर्फ मान और सम्मान की इच्छा रखते हैं इनके लिए धन का कोई मोल नहीं होता हैं| मान सम्मान ही इनका धन है| English Meaning:- Low class Human desire wealth; middle class, both wealth and respect, but the noble, desire honour only, for them honour is the noble man's true wealth. संस्कृत श्लोक - 2 इक...

सत्य पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on Truth with Hindi meaning

 सत्य पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on Truth with Hindi meaning सत्य पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | नासत्यवादिनः सख्यं न पुण्यं न यशो भुवि। दृश्यते नापि कल्याणं कालकूटमिवाश्नतः।। हिंदी अर्थ:- कलाकूट पीने वाले की तरह असत्य बोलने वाले को इस संसार में कोई यश, पुण्य, यश या कल्याण नहीं मिलता। सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्याऽभ्यासेन रक्ष्यते । मृज्यया रक्ष्यते रुपं कुलं वृत्तेन रक्ष्यते ॥ हिंदी अर्थ:- धर्म का रक्षण सत्य से, विद्या का अभ्यास से, रुप का सफाई से, और कुल का रक्षण आचरण करने से होता है । ये वदन्तीह सत्यानि प्राणत्यागेऽप्युपस्थिते । प्रमाणभूता भूतानां दुर्गाण्यतितरन्ति ते ॥ हिंदी अर्थ:- प्राणत्याग की परिस्थिति में भी जो सत्य बोलता है, वह प्राणियों में प्रमाणभूत है । वह संकट पार कर जाता है । सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः । सत्येन वायवो वान्ति सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम् ॥ हिंदी अर्थ:- सत्य से पृथ्वी का धारण होता है, सत्य से सूर्य तपता है, सत्य से पवन चलता है । सब सत्य पर आधारित है । सत्यमेव व्रतं यस्य दया दीनेषु सर्वदा। कामक्रोधौ वशे यस्य स साधुः – क...

राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान में क्या अंतर है | Difference between National Song and anthem in Hindi

राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान में अंतर क्या है| | What is the difference between national song and national anthem in Hindi | दोस्तो, आपने सुना होगा कई बार हमारे देश में राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के बारे में विवाद उत्पन्न होते रहते हैं| मुस्लिम समाज और कुछ झूठे सेक्युलर लोग एक तरफ खड़े हो जाते हैं और भारत देश की आज़ादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गीत वन्दे मातराम का विरोध करते हैं| ये लोग कहते हैं हम भारत के राष्ट्रिय गान (जन गन मन) का तो समर्थन करते हैं लेकिन राष्ट्रिय गीत (वन्दे मातरम्) को नहीं गायेंगे. यह सब देख कर आपके मन में भी विचार आता होगा की ऐसा क्या अंतर है दोनों में| आज हम इसी के वारे में विचार से चर्चा करेंगे की राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान में ऐसा क्या अंतर है और इनसे जुड़े क्या विवाद हैं| राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान में अंतर | Difference between National Song and anthem in Hindi दोस्तो, राष्ट्रिय गीत और राष्ट्रिय गान दोनों में एक बात सामान है की दोनों ही गीत भारतीय आज़ादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं| दोनों ही गीतों ने भारतीय समाज को अपने आत्म सम्मान से जीने के...