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अहिंसा पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on Non-violence with Hindi Meaning

 अहिंसा पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on Non-violence with Hindi Meaning

"अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च"

अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है,लेकिन धर्म को बचाने के लिए हिंसा उससे भी बड़ा धर्म है

अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परं तपः।

अहिंसा परं सत्यं यतोधर्मः प्रवर्तते।।

हिन्दी अर्थ- अहिंसा सबसे परम धर्म है। अहिंसा सबसे उत्तम तपस्या है। अहिंसा सर्वश्रेष्ठ सत्य है, क्योंकि अहिंसा से ही __ धर्म चलता है।

अहिंसा परमो यज्ञस्तथाहिंसा परं फलम् ।

अहिंसा परमं मित्रमहिंसा परमं सुखम् ॥29॥

शब्दार्थ – अहिंसा परम यज्ञ है, अहिंसा ही परम फल है, वह परम मित्र है, और वही परम सुख है।

अहिंसा परमो धर्मः स च सत्ये प्रतिष्ठितः ।

सत्ये कृत्वा प्रतिष्ठां तु प्रवर्तन्ते प्रवृत्तयः ॥74॥

अहिंस्रस्य तपोऽक्षय्यमहिंस्रो यजते सदा।

अहिंस्रः सर्वभूतानां यथा माता तथा पिता।।

हिन्दी अर्थ- अहिंसा का पालन करने वाला अर्थात हिंसा न करने वाले मनुष्य की तपस्या कभी नष्ट नहीं होती। अहिंसक मनुष्य सदा यज्ञ करता रहता है। अहिंसक मनुष्य सभी प्राणियों के लिए माता पिता के समान होता है।

अहिंसा सर्वभूतेभ्यः संविभागश्च भागशः ।

दमस्त्यागो धृतिः सत्यं भवत्यवभृताय ते ॥18॥

अर्थ – सभी प्राणियों के प्रति अहिंसा बरतना, सभी को यथोचित भाग सोंपना, इंद्रिय-संयम, त्याग, धैर्य एवं सत्य पर टिकना अवभृत स्नान के तुल्य (पुण्यदायी) होता है।

एवं सर्वमहिंसायां धर्मार्थमपिधीयते।

अमतः स नित्यं वसति यो हिंसां न प्रपद्यते।।

हिन्दी अर्थ- अहिंसा में संपूर्ण धर्म और अर्थ समाहित हैं। जो व्यक्ति किसी की हिंसा नहीं करता, वह जन्म-मरण से मुक्त । होकर अमृत्व प्राप्त कर लेता है।

अहिंसा परमो धर्मो ह्यहिंसा परमं सुखम्।

अहिंसा धर्मशास्त्रेषु सर्वेषु परमं पदम्।।

हिन्दी अर्थ- अहिंसा सर्वोत्तम धर्म है। अहिंसा परमसुख है। सभी धर्म शास्त्रों में अहिंसा को ही सर्वश्रेष्ठ पद माना गया है। अहिंसा आत्मवत सर्वभूतेषु के सिद्धांत पर आधारित दृष्टिकोण है। अहिंसा के विपरीत आचरण करने वाला व्यक्ति सुखमय जीवन व्यतीत नहीं कर पाता है।

अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परं तपः ।

अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते ॥23॥

अर्थ:- अहिंसा परम धर्म है, अहिंसा परम तप है, और अहिंसा ही परम सत्य और जिससे धर्म की प्रवृत्ति आगे बढ़ती है।

इस वचन के अनुसार अहिंसा, तप और सत्य आपस में जुड़े हैं। वस्तुतः अहिंसा स्वयं में तप है, तप का अर्थ है अपने को हर विपरीत परिस्थिति में संयत और शांत रखना। जिसे तप की सामर्थ्य नहीं वह अहिंसा पर टिक नहीं सकता। इसी प्रकार सत्यवादी ही अहिंसा पर टिक सकता है यह उपदेष्टा का मत है।

रुपमव्यङ्गतामायुर्बुद्धि सत्वं बलं स्मृतिम्।

प्राप्तुकामै रहिंसा वर्जिता वै महात्मभिः।।

हिन्दी अर्थ- जो मनुष्य सुंदरता, पूर्वाङ्गता, दीर्घायु, उत्तम बुद्धि, आरोग्य, बल और स्मरणशक्ति पाप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें हिंसा का सर्वदा के लिए त्याग कर देना चाहिए।

अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम्।

दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम्।।16.2।।

हिंदी अर्थ:- अहिंसा, सत्यभाषण; क्रोध न करना; संसारकी कामनाका त्याग; अन्तःकरणमें राग-द्वेषजनित हलचलका न होना; चुगली न करना; प्राणियोंपर दया करना सांसारिक विषयोंमें न ललचाना; अन्तःकरणकी कोमलता; अकर्तव्य करनेमें लज्जा; चपलताका अभाव।

अहिंसा परमो यज्ञस्तथाहिंसा परमं फलम्।

अहिंसा परम् मित्रमहिंसा परमं सुखम्।।

हिन्दी अर्थ- अहिंसा सर्वश्रेष्ठ यज्ञ है अहिंसा से उत्तम फल प्राप्त होता है अहिंसा परम मित्र है और सबसे उत्तम सुख है।

अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परो दमः ।

अहिंसा परमं दानमहिंसा परमं तपः ॥

हिंदी अर्थ:-

अहिंसा परमो यज्ञस्तथाहिंसा परं फलम् ।

अहिंसा परमं मित्रमहिंसा परमं सुखम् ॥

अहिंसा परमं सत्यमहिंसा परम् श्रुतम् ॥॥

हिंदी अर्थ:-

अहिंसा परमो धर्मः स च सत्ये प्रतिष्ठितः ।

सत्ये कृत्वा प्रतिष्ठां तु प्रवर्तन्ते प्रवृत्तयः ॥

हिंदी अर्थ:-

अहिंसा परमो धर्मः सर्वप्राणभृतां स्मृतः ।

तस्मत्प्राणभृतः सर्वान्न हिंस्याद्ब्राह्मणः क्वचित् ॥॥

हिंदी अर्थ:-

अत ऊर्घ्वं प्रवक्ष्यामि नियतं धर्मलक्षणम् |

अहिंसालक्षणो धर्मो हिंसा चाधर्मलक्षणा ॥ ॥

हिंदी अर्थ:-

सर्वयज्ञेषु वा दानं सर्वतीर्थेषु वाऽऽप्लुतम् ।

सर्वदानफलं वापि नैतत्तुल्यमहिंसया ॥॥

हिंदी अर्थ:-

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