नदी गंगा पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on River ganga with Hindi Meaning
पतितोद्धारिणि जाह्नवि गङ्गे खण्डित गिरिवरमण्डित भङ्गे ।
भीष्म जननि हे मुनिवरकन्ये पतितनिवारिणि त्रिभुवन धन्ये॥
हिंदी अर्थ:- हे पतितजनों का उद्धार करने वाली जह्नुकुमारी गंगे| तुम्हारी तरंगे गिरिराज हिमालय को खण्डित करके बहती हुई
सुशोभित होती है| तुम भीष्म की जननी और जह्नुमुनिकी कन्या हो, पतितपावनी होने के कारण तुम त्रिभुवन में धन्य हो । निरोगी होना परम भाग्य है और स्वास्थ्य से अन्य सभी कार्य सिद्ध होते हैं ।
यत्र गंगा महाराज स देशस्तत् तपोवनम्।
सिद्धिक्षेत्र च तज्ज्ञेयं गंगातीर समाश्रितम्।।
हिंदी अर्थ:- मां गंगा पृथ्वी पर मनुष्यों को तारती है पाताल में नागों को और पृथिवी पर मनुष्यों को तारती है, इसी के कारण इसको त्रिपथगा कहा जाता है
क्षितौ तारयते मान् नागास्तारयतेऽप्यधः।
दिवि तारयते देवास्तेन त्रिपथगा स्मृता।।
हिंदी अर्थ:- वाल्मीकि रामायण में भी गंगा नदी के जल को परम पवित्र तथा समस्त प्राणियों के पाप का नाश करने वाला बताया गया है | जिसमे कहा गया है कि, विष्णु के चरणों से उत्पन्न, श्री शंकर के सिर पर विराजमान, तथा संपूर्ण पापों को हरने वाला गंगाजल मुझको पवित्र कर दे जो व्यक्ति मां गंगा के नाम का उच्चारण करते हुए कुएं के जल से स्नान करता है उसको गंगा नदी (Ganga River) में स्नान करने वाले व्यक्ति के बराबर पुण्य प्राप्त होता है
गंगे! च यमुने! चैव गोदावरी! सरस्वति!
नर्मदे! सिंधु! कावेरि! जलेSस्मिन् सन्निधिं कुरु।।
हिंदी अर्थ:- अर्थात् हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु, कावेरी नदियों ! (मेरे स्नान करने के) इस जल में (आप सभी) पधारिये । एक अन्य श्लोक भी बहुधा स्नान करते समय बोला जाता है, जो इस प्रकार है ।
दर्शनात्स्पर्शनात्पानात्तथा गंगेतिकीर्तिनात्।
पुनाति पुण्यं पुरूषाशतशोऽथ सहस्रशः।।
हिंदी अर्थ:- जन्म जन्मांतरों से अर्जित पाप चाहे अधिक हों या कम हों, भागीरथी माँ गंगा के प्रसाद से सब पाप नष्ट हो जाते हैं
जन्मजन्मार्जितं पापं स्वल्पं वा यदि वा बहु।
गंगा देवी प्रसादेन सर्वं मे यास्यति क्षयम्।।
हिंदी अर्थ:- महाभारत के वन पर्व में कहा गया है कि, जिस-जिस देश में गंगा नदी बहती है, वही उत्तम देश है और वही तपोवन है गंगा नदी के समीप जितने भी स्थान है, उन सबको सिद्ध क्षेत्र समझना चाहिए।
यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः
समुद्रमेवाभिमुखाः द्रवन्ति।
तथा तवामी नरलोकवीरा
विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति।।
हिंदी अर्थ:- जैसे नदियोंके बहुत-से जलके प्रवाह स्वाभाविक ही समुद्रके सम्मुख दौड़ते हैं, ऐसे ही वे संसारके महान् शूरवीर आपके प्रज्वलित मुखोंमें प्रवेश कर रहे हैं।
गंगेतिनाम संस्मृत्य यस्तु कूपजलेऽपि च।
करोतिमानवाः स्नानं गंगास्नानफलं लभेत।।
हिंदी अर्थ:- मां गंगा सभी पापों को विनष्ट करने वाली तथा स्वर्ग लोक प्रदान करने वाली है | पुराणों के अनुसार जब तक पुरुष की हड्डियां । गंगा में रहती हैं, उतने सहस्त्र वर्षों तक वह स्वर्ग में पूजित होता है
यावदस्थीनी गंगायां तिष्ठन्ति षुरूषस्य तु।
तावद् वर्षसहस्राणि स्वर्गलोके महीयते।।
हिंदी अर्थ:- मोक्षदायनी माँ गंगा का नाम सौ योजन दूरी से भी उच्चारण किए जाने पर जीव के तीनों जन्मों के संचित पाप नष्ट हो जाते
गंगा सिंधु सरस्वती च यमुना गोदावरी नर्मदा
कावेरी सरयू महेन्द्रतनया चर्मण्यवती वेदिका।
क्षिप्रा वेत्रवती महासुरनदी ख्याता जया गण्डकी
पूर्णाः पूर्णजलैः समुद्रसहिताः कुर्वन्तु मे मंगलम् ।।
हिंदी अर्थ:- इस श्लोक का अर्थ भी यही है कि उपर्युक्त सभी जल से परिपूर्ण नदियां, समुद्र सहित मेरा कल्याण करें । गंगा की महिमा तो वर्णनातीत है । उसे प्रणाम कर अपना जीवन सार्थक करने की परंपरा अति प्राचीन है ।
गंगा गंगेतियै म योजनानां शतेपि।
स्थितैरुच्चारितं हन्ति पापं जन्मत्रयार्जितम्।
हिंदी अर्थ:- गंगा नदी (Ganga River) जल में स्नान करने से शीघ्र ही समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और अपूर्व पुण्य की प्राप्ति होती है
स्नातस्य सलिले यस्याः सद्यः पापं प्रणश्यति ।
अपूर्वपुण्यप्राप्तिश्च सद्यो मैत्रेय जायते।।
हिंदी अर्थ:- श्रुति कहती है कि भारतवर्ष में मनुष्यों द्वारा उपार्जित करोड़ों जन्मों के पाप गंगा की वायु स्पर्श मात्र से नष्ट हो जाते हैं | भगवती गंगा के दर्शन मात्र एवं स्पर्श करने से दस गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है
स्पर्शनं दर्शनाद्देव्याः पुण्यं दशगुनां ततः।।
हिंदी अर्थ:- पतित पावनी मां गंगा का रंग श्वेत कमल के समान स्वच्छ है यह उसी प्रकार समस्त पापों का उच्छेदन कर देती है|
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