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छोटे बच्चों के लिए संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित

 छोटे बच्चों के लिए संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit shloks for Kids with Hindi Meaning

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः।।

हिंदी अर्थ:- गुरु ही ब्रह्मा हैं, जो सृष्टि निर्माता की तरह परिवर्तन के चक्र को चलाते हैं। गुरु ही विष्णु अर्थात रक्षक हैं। गुरु ही शिव यानी विध्वंसक हैं, जो कष्टों से दूर कर मार्गदर्शन करते हैं। गुरु ही धरती पर साक्षात परम ब्रह्मा के रूप में अवतरित हैं। इसलिए, गुरु को सादर प्रणाम।

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनं:।

चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलं।।

हिंदी अर्थ:- बड़े-बुजुर्गों का अभिवादन अर्थात नमस्कार करने वाले और बुजुर्गों की सेवा करने वालों की 4 चीजें हमेशा बढ़ती हैं। ये 4 चीजें हैं: आयु, विद्या, यश और बल। इसी वजह से हमेशा वृद्ध और स्वयं से बड़े लोगों की सेवा व सम्मान करना चाहिए।

अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।

उदारचरितानां तु वसुधैवकुटम्बकम्॥

हिंदी अर्थ:- ये अपना है ये दूसरे का है. ऐसा ओछी सोच रखने वाले कहते हैं क‍ि उदार लोगों के लिए पूरी दुनिया एक पर‍िवार है.

विद्यां ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।

पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्।।

हिंदी अर्थ:- विद्या से विनय अर्थात विवेक व नम्रता मिलती है, विनय से मनुष्य को पात्रता मिलती है यानी पद की योग्यता मिलती है। वहीं, पात्रता व्यक्ति को धन देती है। धन फिर धर्म की ओर व्यक्ति को बढ़ाता और धर्म से सुख मिलता है। इस मतलब यह हुआ कि जीवन में कुछ भी हासिल करने के लिए विद्या ही मूल आधार है।

यथा चित्तं तथा वाचो यथा वाचस्तथा क्रियाः।

चित्ते वाचि क्रियायांच साधुनामेक्रूपता।।

साधु यानी अच्छे व्यक्ति के मन में जो होता है, वो वही बात करता है। वचन में जो होता है यानी जैसा बोलता है, वैसा ही करता है। इनके मन, वचन और कर्म में हमेशा ही एकरूपता व समानता होती है। इसी को अच्छे व्यक्ति की पहचान माना जाता है।

रूप यौवन सम्पन्नाः विशाल कुल सम्भवाः।

विद्याहीनाः न शोभन्ते निर्गन्धाः इव किंशुकाः।।

हिंदी अर्थ:- अच्छा रूप, युवावस्था और उच्च कुल में जन्म लेने मात्र से कुछ नहीं होता। अगर व्यक्ति विद्याहीन हो, तो वह पलाश के फूल के समान हो जाता है, जो दिखता तो सुंदर है, लेकिन उसमें कोई खुशबू नहीं होती। अर्थात मनुष्य की असली खुशबू व पहचान विद्या व ज्ञान ही है।

षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता।

निद्रा तद्रा भयं क्रोधः आलस्यं दीर्घसूत्रता।।

हिंदी अर्थ:- 6 अवगुण मनुष्य के लिए पतन की वजह बनते हैं। ये अवगुण हैं, नींद, तन्द्रा (थकान), भय, गुस्सा, आलस्य और कार्य को टालने की आदत।

दुर्जन: परिहर्तव्यो विद्यालंकृतो सन।

मणिना भूषितो सर्प: किमसौ न भयंकर:।।

हिंदी अर्थ:- दुर्जन अर्थात दुष्ट लोग भी अगर बुद्धिमान हों और विद्या प्राप्त कर लें, तो भी उनका परित्याग कर देना चाहिए। जैसे मणि युक्त सांप भी भयंकर होता है। इसका मतलब यह हुआ कि दुष्ट लोग कितने भी बुद्धिमान क्योंं न हों, उनकी संगत नहीं करनी चाहिए।

काम क्रोध अरु स्वाद, लोभ शृंगारहिं कौतुकहिं।

अति सेवन निद्राहि, विद्यार्थी आठौ तजै।।

इस श्लोक के माध्यम से विद्यार्थियों को 8 चीजों से बचने के लिए कहा गया है। काम, क्रोध, स्वाद, लोभ, शृंगार, मनोरंजन, अधिक भोजन और नींद सभी को त्यागना जरूरी है।

अलसस्य कुतो विद्या अविद्यस्य कुतो धनम् ।

अधनस्य कुतो मित्रम् अमित्रस्य कुतो सुखम् ॥

हिंदी अर्थ:- आलस करने वाले को ज्ञान नहीं म‍िलेगा और जिसके पास ज्ञान नहीं सके पास पैसा भी नहीं और जिसके पास पैसा नहीं होगा उसके दोस्त भी नहीं बनेंगे।

सुलभा: पुरुषा: राजन्‌ सततं प्रियवादिन:।

अप्रियस्य तु पथ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभ:।।

हिंदी अर्थ:- हमेशा प्रिय और मन को अच्छा लगने वाले बोल बोलने वाले लोग आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन जो आपके हित के बारे में बोले और अप्रिय वचन बोल व सुन सके, ऐसे लोग मिलना दुर्लभ है।

सुलभा: पुरुषा: राजन्‌ सततं प्रियवादिन: ।

अप्रियस्य तु पथ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभ:।।

हिंदी अर्थ:- मीठा-मीठा और अच्छा लगने वाला बोलने वाले बहुतायत में मिलते हैं लेकिन अच्छा न लगने वाला और हित में बोलने वाले और सुनने वाले लोग बड़ी मुश्किल से मिलते हैं.

अनादरो विलम्बश्च वै मुख्यम निष्ठुर वचनम।

पश्चतपश्च पञ्चापि दानस्य दूषणानि च।।

हिंदी अर्थ:- अपमान व अनादर के भाव से दान देना, देर से दान देना, मुंह फेरकर दान देना, कठोर व कटु वचन बोलकर दान देना और दान देने के बाद पछतावा करना। ये सभी पांच बातें दान को पूरी तरह दूषित कर देती हैं।

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्शो महारिपुः ।

नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कुर्वाणो नावसीदति ॥

हिंदी अर्थ:- आलस ही आदमी की देह का सबसे बड़ा दुश्मन होता है और परिश्रम सबसे बड़ा दोस्त. परिश्रम करने वाले का कभी नाश या नुकसान नहीं होता.

उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः ।

न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥

हिंदी अर्थ:- कार्य करने से ही सफलता मिलती है, न कि मंसूबे गांठने से. सोते हुए शेर के मुंह में भी हिरन अपने से नहीं आकर घुस जाता

श्लोकार्धेन प्रवक्ष्यामि यदुक्तं ग्रन्थकोटिभिः ।

परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ॥

हिंदी अर्थ:- करोड़ों ग्रंथों में जो बात कही गई है वो आधी लाइन में कहता हूं, दूसरे का भला करना ही सबसे बड़ा पुण्य है और दूसरे को दुःख देना सबसे बड़ा पाप.

मूर्खस्य पञ्च चिह्नानि गर्वो दुर्वचनं मुखे।

हठी चैव विषादी च परोक्तं नैव मन्यते।।

हिंदी अर्थ:- इस श्लोक में कहा गया है कि मूर्खों की पांच पहचान होती हैं। सबसे पहला अहंकारी होना, दूसरा हमेशा कड़वी बात करना, तीसरी पहचान जिद्दी होना, चौथा हर समय बुरी-सी शक्ल बनाए रखना और पांचवां दूसरों का कहना न मानना। श्लोक इन सभी पांच चीजों से बचने की प्रेरणा देता है।

विद्यां ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम् ।

पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥

हिंदी अर्थ:- पढ़ने-लिखने से व्‍यक्‍त‍ि व‍िनयशील बनता है और व‍िनय से काबिलियत आती है, काबिलियत से पैसे आने शुरू होते हैं. पैसों से धर्म और फिर सुख मिलता है.

देवो रुष्टे गुरुस्त्राता गुरो रुष्टे न कश्चन:।

गुरुस्त्राता गुरुस्त्राता गुरुस्त्राता न संशयः।।

हिंदी अर्थ:- देवताओं के रूठ जाने पर गुरु रक्षा करते हैं, किंतु गुरु रूठ जाए, तो उस व्यक्ति के पास कोई नहीं होता। गुरु ही रक्षा करते हैं, गुरु ही रक्षा करते हैं, गुरु ही रक्षा करते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं। इसका मतलब यह है कि अगर पूरा विश्व व भाग्य भी किसी से विमुख हो जाए, तो गुरु की कृपा से सब ठीक हो सकता है। गुरु सभी मुश्किलों को दूर कर सकते हैं, लेकिन अगर गुरु ही नाराज हो जाए, तो कोई अन्य व्यक्ति मदद नहीं कर सकता।

मूर्खस्य पञ्च चिह्नानि गर्वो दुर्वचनं मुखे ।

हठी चैव विषादी च परोक्तं नैव मन्यते ॥

हिंदी अर्थ:- मूर्खों की पांच निशानियां होती हैं, अहंकारी होते हैं, उनके मुंह में हमेशा बुरे शब्द होते हैं, जिद्दी होते हैं, हमेशा बुरी सी शक्ल बनाए रहते हैं और दूसरे की बात कभी नहीं मानते.

अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।

उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।।

हिंदी अर्थ:- छोटे चित यानी छोटे मन वाले लोग हमेशा यही गिनते रहते हैं कि यह मेरा है, वह उसका है, लेकिन उदारचित अर्थात बड़े मन वाले लोग संपूर्ण धरती को अपने परिवार के समान मानते हैं।

काक चेष्टा, बको ध्यानं, स्वान निद्रा तथैव च।

अल्पहारी, गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं।।

हिंदी अर्थ:- एक विद्यार्थी के पांच लक्षण होते हैं। कौवे की तरह हमेशा कुछ नया जानने की प्रबल इच्छा। बगुले की तरह ध्यान व एक्राग्रता। कुत्ते की जैसी नींद, जो एक आहट में भी खुल जाए। अल्पाहारी मतलब आवश्यकतानुसार खाने वाला और गृह-त्यागी।

न चोरहार्य न राजहार्य न भ्रतृभाज्यं न च भारकारि।

व्यये कृते वर्धति एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्।।

हिंदी अर्थ:- एक ऐसा धन जिसे न चोर चुराकर ले जा सकता है, न ही राजा छीन सकता है, जिसका न भाइयों में बंटवार हो सकता है, जिसे न संभालना मुश्किल व भारी होता है और जो अधिक खर्च करने पर बढ़ता है, वो विद्या है। यह सभी धनों में से सर्वश्रेष्ठ धन है।

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